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Wednesday, 28 May 2008

चलो फिर से मुस्कुराएँ

चलो फिर से मुस्कुराएँ

चलो फिर से दिल जलाएँ

जो गुज़र गई है रातें

उन्हें फिर जगा के लायँ

जो बिसर गई हैं बातें

उन्हें याद में बुलाएँ

चलो फिर से दिल लगाएँ

चलो फिर से मुस्कुराएँ

किसी शह-नशीं पे झलकी

वोः धनक किसी क़बा की

किसी रग में कसमसाई

वोः कसक किसी अदा की

कोई हर्फ़-- मुरव्वत

किसी कुंज--लब से फूटा

वोः छनक के शीशा-- दिल

तह--बाम फिर से टूटा

येः मिल की, नामिलन की

ये लगन की और जलन की

जो सही हैं वारदातें

जो गुज़र गई हैं रातें

जो बिसर गई हैं बातें

कोई इनकी धुन बनाएँ

कोई इनका गीत गाएँ

चलो फिर से मुस्कुराएँ

चलो फिर से दिल जलाएँ